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GratitudeQuotes

Osho gratitude quotes in hindi

ओशो कहा करते थे, के वर्तमान जीवन में हमने अगर कुछ खो दिया हैं, तो वो कृतज्ञता हैं। हम अगर कुछ भुला चुके हैं,तो वो कृतज्ञता हैं। 

आज जिसे देखो वो परेशान, वो अपना दुःख गाता फिरता हैं। अमीर भी दुखी हैं, गरीब बेचारा भी परेशान हैं। अमीर दुखी हैं क्युकी उसे और चाइए,उसकी मांग कभी पूरी नहीं होती। एक बंगला हैं और एक बंगला चाहिए, एक गाड़ी एच और गाड़ी चाहिए, बिजनेस में लाखो का मुनाफा हो रहा हैं फिर भी खुश नहीं है, और चाहिए और अधिक के आश मैं बेचारा परेशान हैं।

इधर गरीब भी परेशान हैं, इसलिए के उसे तो कुछ सूझता ही नही, के उसके पास कुछ हैं भी। वो सारा जीवन अपने कुछ नही होने का रोना रोता फिरता हैं। कोई सुखी नही हैं, जिसे देखा देहरो शिकायत का बोझा लिए इधर उधर मारा मारा फिर रहा हैं।

इधर गरीब भी परेशान हैं, इसलिए के उसे तो कुछ सूझता ही नही, के उसके पास कुछ हैं भी। वो सारा जीवन अपने कुछ नही होने का रोना रोता फिरता हैं। कोई सुखी नही हैं, जिसे देखा देहरो शिकायत का बोझा लिए इधर उधर मारा मारा फिर रहा हैं। हमारी सदी में कुछ खो गया है, तो वो कृतज्ञता खोगाया हैं, gratitude खो गया हैं। अपको पता हैं, जो सांस आप ले रहे हैं वो आप नही ले रहे हैं। क्युकी सांस जिस क्षण नही आयेगी आप उसे नही ले सकेंगे।

अपको पता हैं यह देह जो आपको मिली हैं यह बॉडी जिसे आप कहते हैं, वो बोहत बड़ी miracle हैं इस धरती पर, यह बोहोत अदभुद हैं के आप जो खाना खाते हैं वो छोटे से पेट पचा देता हैं, उसे खून बना देता है। अपको अगर कहा जाए एक रोटी को पचा के खून बनाने को, अपको कभी नही बना पाएंगे।एक रोटी को पचा के खून बना देना मुश्किल हैं। यह शरीर जो आपके पास हैं 24x7x365 miracle कर रहा हैं। यह छोटी सी शरीर। आप इसकी कद्र नहीं करते। इसके प्रति कृतज्ञता नही है, ग्रेटिट्यूड नही हैं।

ओशो कहते हैं, कभी अपने अपने शरीर को प्रेम किया हैं? कभी अपने हाथो को चूमा हैं, कभी अपने आखों को प्रेम किया हैं? कभी यह खयाल किया हैं के क्या अदभुद घटित हो रहा है। सैयद ही आप में से कोई ऐसा हो, जो अपने हाथो को चूमा होगा, अपने शरीर से प्रेम करता होगा। अगर कृतज्ञ होना ही हैं तो सबसे पहले अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ हो जाए। क्यूंकि जो अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ नहीं है, वो दूसरो की शरीर के प्रति कृतज्ञ नहीं हो सकता।जो अपने सरीर के प्रति कृतज्ञ हैं, वोही केबल दूसरो के प्रति कृतज्ञ हो सकता हैं। और सबसे पहले अपने शरीर के प्रति प्रेम से भर जाए, क्यूंकि जो अपने शरीर के प्रति प्रेम से भरा होता हैं वोही केबल दूसरो के प्रति प्रेम को उजागर कर सकता हैं।

शरीर चमत्कार हैं। इसके प्रति कृतज्ञता से भर जाए।कभी अपने यह गौर किया हैं, जो महापंचभूत आप के बाहर हैं वोही आपके भीतर हैं। आप इस पकृति से अलग नहीं हैं, यह तो आपकी सोच हैं खुद को भिन्न समझते हैं। आप भिन्न नहीं हैं जो आपके बाहर हैं वोही आपके भीतर है।जो इन शरीर में हैं वो अपको इन पंचभूतो से मिला हैं, इस शरीर के प्रति कृतज्ञ होए, इन पंचमहाभूतो के प्रति कृतज्ञ से भर जाए। यह सूरज,हवा,सागर,पृथ्वी, आकाश यह सब का बड़ा गहरा प्रभाव हैं हमारे जीवन में, इनको छोर कर आप जीवन को एक पल जीने का सोच भी नही सकते।

उनके प्रति हमे कृतज्ञ होना चाहिए। यह सूरज जो पूरे धरती में प्राण का मूल आधार हैं, बैयगणिक कहते हैं एक समय आयेगा के सूरज नहीं उगेगा, सूरज की रोशनी खत्म हो जाएगी, क्योंकि यह बोहूत रोशनी दे चुका अब धीरे धीरे एक समय के बाद इसकी रोशनी बाकी नहीं रहेगी – तो क्या होगा, इस धरती में जीवन का आधार ही खत्म हो जाएगा। यह सूरज की ऊष्मा, इसकी ताप का हिस्सा हमारे शरीर में हैं, इसके प्रति हमे कृतज्ञ होना चाहिए।यह पानी जो हम पीते हैं, इसकी कीमत आज हम नही समझ रहे हैं, यह पानी एक दिन सुख जायेगा, तब हम कहा जायेंगे? Lakho करोड़ो रुपए रहने के बाद भी धरती से पीने का पानी ही नहीं बचेगा तब हम कहा जायेंगे? ये पानी के प्रति कृतज्ञ से भर जाए।

येह हवा जो हमारे प्राणों को चलाता हैं, जिसके बिना कुछ मिनिट हम जिंदा रह नहीं सकेंगे इनके प्रति कृतज्ञता से भर जाए। Gratitude से भर जाए। यह आकाश यह धरती जो हमे बनाता हैं इनके प्रति कृतज्ञता से भर जाए।ओशो कहा करते थे, कृतज्ञता को दिव्य हैं, इसके बिना को आदमी धार्मिक नही हो सकता। अकृतज्ञ आदमी क्या धार्मिक होंगे। इस कृतज्ञता को अनुभव करें, निरंतर अनुभव करें और आप हैरान हों जाएंगे, यह अपको इतनी शांति से भर देगी कृतज्ञता आप इतना अपने भीतर शांति का अनुभव करेंगे। और तब आपको एहसास होगा के ये सारी चीजें जो आपको मिली हैं, उसमे आपका कोई कमाल नहीं हैं, और तब जाकर आपका मन में धन्यवाद होगा। जो आपको मिला हैं उसके प्रति कृतगयता का बोध होगा।

तो कृतज्ञता को ज्ञापन करना के, कृतज्ञता को विकसित करने का उपाय करें उससे आपका जीवन भिन्न हो जाएगा। एकदम से आपका जीवन में एक बदलाव आ जायेगा। जीवन में सतत कृतज्ञता का सम्रानपूर्बक बेबोहर करें आप पाएंगे के आपका जीवन बिलकुल अदभुद हो जायेगा।कृतज्ञता को जीवन में ढालने के लिए इसकी अधिक से अधिक विकसित करने के लिए, कृतज्ञता पर ओशो की अनमोल विचार हमेशा अपको कृतज्ञ रहने में भीतर से प्रेरणा देगी:

Osho Quotes on gratitude in Hindi:

कृतज्ञता पर ओशो के अनमोल वचन:

१.”सभी क्षण सुंदर हैं, केवल आपको ग्रहणशील और समर्पण करने वाला होना है। सभी क्षण आशीर्वाद हैं, केवल आपको देखने में सक्षम होना है। सभी क्षण वरदान हैं। यदि आप गहरी कृतज्ञता के साथ स्वीकार करते हैं, तो कुछ भी गलत नहीं होता है।”

२.”अस्तित्व का सारा खेल इतना सुंदर है कि हंसी ही उसकी प्रतिक्रिया हो सकती है।  केवल हँसी ही सच्ची प्रार्थना, कृतज्ञता हो सकती है।”

३.”नम्रता तभी पैदा होती है, कृतज्ञता तभी पैदा होती है, जब तुमने अनुभव किया हो कि गुरु शब्दों से, कर्मों से, मौन से, हर संभावना के माध्यम से क्या व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं – क्योंकि वह अनुभव कुछ अवर्णनीय है।”

४.”कृतज्ञता स्वाभाविक है। कृतज्ञता कोई ऐसी चीज नहीं है जिसका अभ्यास किया जा सके।”

५.”इतनी गहराई से और इतनी कृतज्ञता के साथ इसका आनंद लें कि हर साधारण चीज पवित्र हो जाए, पवित्र हो जाए, जीवन की हर छोटी चीज पवित्र हो जाए। हर चीज को एक पवित्र चीज में बदल दें – जब आप अपनी प्रेम, कृपा, कृतज्ञता की ऊर्जा लाते हैं तो अपवित्रता गायब हो जाती है।”

६.”इसमें कोई योग नहीं है, इसमें कोई तंत्र नहीं है। यह बस कहता है: जीवन पर भरोसा करो, भगवान पर भरोसा करो, और जो कुछ भी तुम्हें दिया गया है, उसका आनंद लो।”

हमे उम्मीद हैं ओशो की इन विचार धारा आपके जीवन में एक नया रंग भर देगा। सतत कृतज्ञता का रंग। पोस्ट अगर अच्छी लगी हैं तो हमारे ब्लॉग को सबस्क्राइब करना ना भूले। धन्यवाद।

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