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Hindi story

Hindi story about feeling gratitude

 Short story about gratitude

मैं आपको एक आदमी के बारे में एक कहानी बताता हूँ।  जो हमेशा अपने जीवन में कमियों को लेकर रोता रहता था। वो हमेशा शिकायत किया करता था। लेकिन एक दिन उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जो उसके जीवन को पूरा बदल के रख दिया। 
एक दिन उसकी दोनो आँखों में तकलीफ़ शुरू हो गया और यह दर्द एक दिन तक वैसा ही रहा । वह अगले दिन डॉक्टर के पास गया  और डॉक्टर ने चेकैप किया कि यह एक कैंसरयुक्त वृद्धि है जिसके लिए उसके दोनो आंखो को निकालना होगा।  नहीं तो कैंसर उसके पूरे शरीर में फैल जाएगा।  
यह सुनकर वो आदमी चकनाचूर हो गया। मानो उसके पैर के नीचे से जमीन खिसक गए। वो यह सोचने लगा के बगैर दोनो आंखों के वो कैसे जीवन को देख पाएगा, कैसे वो आपन बाकी जीवन को गुजर पाएगा। यह सोच सोच कर मानो उसका हल बेहाल हो चुका था।
 
Operation के दिन वह इस सोच के साथ सर्जरी वार्ड में दाखिल हुआ कि जब मैं बाहर आऊंगा तो मेरी आंखें नहीं होंगी।
हालांकि जब डॉक्टर ने उसकी आंखों में प्रवेश किया और operation शुरू हुई, तो उन्होंने पाया कि यह रेटिना के पीछे एक दुर्लभ फंगस था।  उन्होंने उसे साफ किया और उसकी आँखें वापस से सिल दिया।
अंत में जब इस आदमी की पट्टियां खोली गईं तो उसने पाया कि वह अभी भी देख सकता है।  उसकी आंखें बिल्कुल सही सलामत था। वो अपने आंखों से वो सारा कुछ अच्छी तरह देख सकता था जैसा के वो पहले देखा करता था। उसकी आंखों की दर्द भी एकदम से ठीक हो चुका था। वो बिलकुल स्वस्थ महसूस कर रहा था। 
उसे यकीन ही नहीं हो रहा था के surgery होने के बाद भी उसकी आंखें बिल्कुल सही था, और डॉक्टर ने जो कहा था वैसा कुछ करने के जरूरत ही नही हुए। यह घटना के बाद अब वो बयक्ति नही रहा जो थोड़ी देर surgery से पहले हुआ करता था।
उसकी मन,बुद्धि मानो एकदम से सब कुछ बदल सा गया था।वो अब जाकर अपने दोनो आंखों की अहमियत को जान सका था। वो यह समझ चुका था के जीवन कितना अनमोल उपहार हैं। परमेश्वर ने हमारे शरीर का हर एक एक अंग कितना अनमोल और अनोखा बनाया हैं। दुनिया की कोई भी चीज़ इसकी जगह नहीं ले सकती।
अब वह दृष्टि के उपहार के लिए परमेश्वर का आभारी था। इस हादसे के बाद से एक चिरचीरा और हरवक्त शिकायत करने वाला इंसान अब पूरा बदल चुका था। इस ऑपरेशन के बाद से वो कृतज्ञ बन चुका था। उसका दिल धन्यवाद के भाव से भर चुका था। वो जीवन के अनमोल होने वाली बात खूब अच्छी तरह समझ गया था।
Moral of the story:

जितना हो सके उतना कृतज्ञ महसूस करें। हमें ये दो उपकरण यानी दोनो आंखें जो मिले हैं  उसके लिए जितना हो सके कृतज्ञता महसूस करके उनके आशीर्वाद को याद करे। परमेश्वर का बराबर हर बार धन्यवाद दें, धन्यवाद के भाव से भर जाए।

निष्कर्ष:
आइए अपना ध्यान अपने जीवन के उन आशीरबादो के ओर मोड़ें।    हम अपने जीवन में आधे-अधूरे उपहारों से इतने अभिभूत होंगे  कि हमें हर्षित होने, आशावादी होने, उत्साही होने के लिए सौ मिलियन कारण मिलेंगे।  
तो आइए हम न केवल अपने लिए, बल्कि पूरे विश्व में अपने आसपास के समुदाय के लिए कृतज्ञता की लहर शुरू करें।  आइए हम अपने प्रियजनों को यह अद्भुत उपहार दें। 
कृतज्ञता महसूस करके उनके आशीर्वाद को याद करके उन्हें खुश करने में सक्षम बनाएं और इस तरह कृतज्ञता की लहर का निर्माण करें, जो व्यक्ति से परिवार तक समुदाय में फैल जाएगी।  पूरी दुनिया को।
 और जिस तरह से हम महसूस करते हैं, जिस तरह से हम सोचते हैं और जिस तरह से हम कृतज्ञता की अभ्यास का प्रयोग करते हैं, उसमें आदर्श बदलाव लाएं। 
Source: https://youtu.be/-6ozrHQlRQU
मैं बोहोत आभारी हूं स्वामी मुकुंदानंद जी का कृतज्ञता के ऊपर इतने अनमोल वचन और विचार के लिए। धन्यवाद।

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