Home>>Gratitude>>Hindi story>>एक संत और एक किसान की कहानी – Hindi story on gratitude
Hindi story

एक संत और एक किसान की कहानी – Hindi story on gratitude

बहुत सालों पहले की बात है पुनिखा नाम का एक राज्य हुआ करता था जहां पर छोटी-छोटी गांव हुआ करता था। वहा के राजा का नाम था राजा सुरेंद्रनाथ चौहान। जो एक वीर और नयपरायण राजा थे। जो हमेशा अपने प्रजा के लिए भला सोचा करते थे। सारे गांव के रहने वाले लोग माली और स्वास्थ्य के एतवार से काफी बेहतर और अच्छे परिस्थिति में थी।

Gratitude Hindi story

उसमें से एक छोटा सा गांव था, जिसका नाम बलरामपुर हुआ करता था। उस गांव में रहने वाले लोग अन्य दूसरे गांव के तुलना में थोड़े दुर्बल और आर्थिक रूप से कमजोर थे। उस गांव के पास में एक घना जंगल हुआ करता था। वह जंगल में जाने का साहस किसी में भी नहीं थी। अक्सर गांव की औरतें उस गांव के पास जाकर सामने से ही लकड़िया वगैरह चुनकर लाया करती थी। उस जंगल के भीतर जाने के साहस किसी में नहीं थी। यह माना जाता था कि उस जंगल में एक भूल भुलैया है। जो भी उस जंगल के भीतर प्रवेश करता है वह उस भूल भुलैया में फस कर रह जाता है और कभी बाहर नहीं आ पाता हैं।

यही कारण था उस जंगल के अंदर जाने की प्रयास कोई भी नहीं करता था।एक दिन गांव में होली का त्यौहार आया। गांव के सारे लोग अपने सारे दुखों और कष्टों को भूल कर एक खुशी मानने लगे।

उसी दौरान एक शोर पीछे की तरफ से उस भीड़ को चीरते हुए लोगों के कानों तक आई के मुखिया जी का पोता मंजू कहीं मिल नहीं रहा है। यह सुनते हैं मानो पूरी गांव की होली के त्यौहार का आनंद में ग्रहण लग गया सारे लोग खामोश और चिंतित हो गए। खोज चालू हुई सब लोग जुट गए गांव के मुखिया जी ने पंचायत बिठाया और यह ऐलान किया कि शाम ढलने से पहले मेरा पोता मुझे मेरे घर में होना चाहिए हंसता खेलता। कैसी भी कर उसे खोजें और अंधेरे होने से पहले पहले उसे ढूंढना ही पड़ेगा।

यह कहने के बाद मुख्य जी ने दो दल बनाएं एक दल को जिम्मेदारी दी गांव के एक प्रांत में जाकर हर घर-घर कुटिया हर जगह अच्छे से तलाश करने को और दूसरे दल को जिम्मेदारी दी जंगल की ओर जाने की।यह बात तय होने के साथ ही साथ उस ग्रहों के लोग आपस में भिन्-भिन् करने लगे और कहने लगे कि वह जंगल तो भूल भुलैया का जंगल है। वहां तो कोई भी जाता नहीं है। कैसे जाएं जो भी उसे ढूंढने के लिए उस जंगल में जाएगा तो खुद ही गुम हो जाएगा।

उस जंगल में जाने का साहस तो आज तक किसी ने नहीं किया। उसमें से एक कहने लगा कि हां भाई तुम सही कह रह हो। लेकिन हम लोग कर भी क्या सकते हैं मुखिया जी का आदेश है जाना तो पड़ेगा ही आखिर छोटे बच्चे की बात है – वह भी मुखिया का पोता।यह कहकर वह दल बच्चे की तलाश में जंगल की ओर बढ़ने लगे। जैसे-जैसे जंगल करीब आ रहा था सबकी हाथ पैर मानो ठंडी होने लगी थी। सबके मन में एक डर काम कर रहा था। सबको यही लग रहा था कि ना जाने आगे क्या होने वाला है।प्रभु का नाम लेकर सब आगे चलते रहे।

थोड़ी देर जंगल में जाने के बाद एक पीपल का पेड़ देखने को मिला। कोनो मैं हल्की हल्की किसी की खेलने की आवाज आह रही थी। सारे लोग साहस जुटाकर उस पर की ओर बढ़े और देखें वह मुखिया जी का पोता मंजू पेड़ के नीचे एक बकरी के बच्चे के साथ खेल रहा था। और उस पेड़ के नीचे एक साधु बाते हुए है।

सारे लोग खुशी-खुशी सबसे पहले उस बच्चे को लेकर उस साधु के पास गए। काफी देर के बाद साधु ने अपनी आंखें खोली और गांव के लोगों को देखने लगे। उन सारे लोग मिलकर साधु की प्रति कृतज्ञ प्रकट किए। उसमें से एक बोला कि गुरु जी इस जंगल में आप कब से रहते हैं इस जंगल के बारे में तो हम लोग कई सालों से यही सुनते आ रहे हैं कि यह एक भूलभुलैया का जंगल है यहां कोई प्रवेश नहीं कर पाता है। जो इस जंगल की भूल भुलैया में आता है। वह कभी वापस नहीं जा पाता।आप कैसे इस जंगल में रहते हैं।

साधु ने मुस्कुराया और कहने लगे बच्चे इस बात से तुम्हारा कोई लाभ नहीं होगा कि मैं इस जंगल में कब से रहता हूं तुम यह बताओ कि तुम्हारी जिज्ञशा क्या है तुम क्या चाहते हो। वो लोग कहने लगे के महाराज जी हमें तो यह मालूम नहीं था कि आप इस जंगल में मिलेंगे हम लोग तो मुखिया जी का पोते मंजू की खोज में आए थे।क्या आप बता सकते हैं कि यह बच्चा आपको यहां कैसे मिला तो महाराज जी ने कोई जवाब नहीं दिया और कहने लगे कि अब तुम्हें तुम्हारा चीज मिल चुका है तो तुम इसे लेकर जा सकते हो। यह कहकर साधु फिर अपने साधना में बैठ गए।

इसके बाद गांव के लोग आपस में मिलकर तय किए के उन्हे अब गांव वापस जाना चाहिए और सब के सब वहां से मुखिया जी के पोते को लेकर वापस गांव चलें।सिर्फ एक इंसान जिसका नाम था चंपक वह वहां साधु के पास बैठे रहा। गांव के काफी लोगों ने उसे कहा कि चल तुझे जाना नहीं है तू वह चंपक कहा तुम लोग जाओ मैं बाद में आता हूं यह कहकर चंपक साधु के पास चुपचाप बैठे रह गया। सोचने लगा कि यह महाराज कोई मामूली इंसान नहीं है यह कोई सिद्धि प्राप्त साधु है, कोई महान संत हैं यही कारण है कि इस जंगल में रह रहे हैं। ना जाने कब से रह रहे हैं यह तो नहीं मालूम लेकिन यह कोई महान आत्मा है यह मन ही मन में चंपक सोचने लगा वहां बैठे रहा बहुत देर हो गई शाम होने को आया सूरज धीरे धीरे ढल चुका था।

आसमान में चांद निकल आया रात हो गई चंपक अभी भी वहां बैठा था चंपक के गांव में उसकी बीवी परेशान हो रही थी चिंतित हो रही थी।बाकी लोगों जब गांव पोहचे तो चंपक की बीवी ने पूछा चंपक के बारे में। गांव के लोगों ने बताया के हम लोगों ने चंपक को कहा था कि चल हमारे साथ लेकिन वही नहीं माना और वह उस साधु के पास बैठा रहा।

दूसरी तरफ यह नहीं पता चला था कि आखिरकार मंजू उस जंगल के अंदर कैसे पहुंचा था। लेकिन अब किसी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था। क्योंकि उनका पोता मंजू उन्हें मिल चुका था तो इसी बात से सब काफी खुश थे और गांव के उन दल के लोगों को पुरुष्कृत भी किया गया।

इधर जंगल के अंदर चंपक अभी भी साधु के पास बैठा था और वह इंतजार कर रहा था कि कब गुरु जी अपनी आंखें खोल कर ध्यान से उठेंगे तो वह अपना मन की बात उस महाराज जी से कहेगा। इस अपेक्षा में ढेर रात हो चुकी थी उसे काफी भूख और प्यास भी लगी थी।

अचानक से उसके मन में यह ख्याल आया कि थोड़ी पीने का पानी अगर मिल जाता तो काफी एहसान होता। यह बात अभी चंपक मन ही मन सोच रहा था की अचानक उसने देखा कि साधु ने आंखें खोली और चंपक से कहा कि बच्चे सारे लोग तो चले गए तुम अभी भी यहां बैठे हो, काफी रात हो चुकी है तुम गांव वापस नहीं गए? चंपक सबसे पहले गुरु जी के चरणों में गिरकर उनको प्रणाम करने लगा और कहने लगा कि गुरु जी वह लोग आप को नहीं समझ पाए लेकिन मुझे इस बात का पूरा विश्वास है – कि आप जरूर मेरी मदद कर सकते हैं। क्योंकि आप कोई आम मनुष्य नहीं बल्कि महान आत्मा है।

साधु ने यह सुनकर कोई उत्तर नहीं दिया और उठ कर अपने कोठरी के अंदर चले गए।कुछ देर के बाद कोठरी से वापस आए और गुरु जी ने चंपक को एक पानी का पियाला दिया और कहा कि पी लो। चंपक की आंखों से आंसू झलक पड़ी, वो यह सोच रहा था कि मैंने तो यह बात मन ही मन कहा था गुरु जी को कैसे पता चला कि मुझे प्यास लगा है।

उसका विश्वास और मजबूत हो गया उसको यकीन हो गया कि यह सच में कोई आम साधु नही है कोई महान संत हैं। साधु के दिए हुए पानी को पी कर अपनी प्यास को बुझाया। इसके बाद गुरुजी के पास बैठकर गुरुजी से यह पूछने लगा के महाराज जी आखिरकार आप कैसे घने जंगल में अकेले वास करते हैं गुरु जी ने सिर्फ हल्की से एक मुस्कुराहट के साथ कहा कि तुम क्या चाहते हो?

चंपक ने कहा कि गुरु जी मैं बस एक ही चीज जीवन में चाहता हूं वह यह है कि मैं अपने बीवी और बच्चे को एक अच्छी जीवन दे सकूं मेरा आर्थिक अवस्था काफी कमजोर है, मेरी जमीन मैं आप की फसल भी सही तरह से नहीं हुई है, बरसात के मौसम के कारण आदि फसल नष्ट हो चुकी है, मेरा स्वास्थ्य भी अक्सर खराब रहता है, मेरे बच्चे भी अक्सर बीमार रहते हैं, मैं अपने पत्नी का सही से ख्याल नहीं रख पाता हूं, मेरी पत्नी बहुत अच्छी है लेकिन उसकी जरूरत को मैं पूरा नहीं कर पाता हूं – गुरुजी ने कहा बस इतनी सी बात!

मैं तुम्हें एक मंत्र सिखाता हूं जिसका तुम्हें हर दिन हर पल हार काम को खत्म या शुरू करने से पहले, दिन के शुरु और दिन के आखिरी में, सो कर उठ के और सोने जाने से पहले जब जब तुम्हें मौका मिले तब तब इस मंत्र का जाप करना। साधु ने चंपक को मंत्र बता दिया और कहा कि रात बहुत हो चुकी है, आज तुम मेरी कोठरी में ही रात गुजार सकते हो कल सवेरे होते ही तुम गांव को लौट जाना।

अगले दिन सवेरे जब चंपक कि नींद खुली तो उसने देखा के साधु अपने सज्जा में नहीं थे वह उसी पीपल के पेड़ के नीचे साधना में बैठे थे। चंपक ने एक बार के लिए सोचा कि गुरु जी को आखरी धन्यवाद कहकर गांव की ओर बढूंगा फिर उसने सोचा कि नहीं गुरु जी अब ध्यान में बैठ चुके हैं तो उनके ध्यान में बिग्न ना डालना सही होगा। अब यह सोचकर गांव की ओर बढ़ गया।

अगले दिन सवेरे चंपक की पत्नी, चंपक को देख कर खुशी से भर गए। चंपक चेहरा मानो पहले से काफी चमक से भरा था। वो अपनी पत्नी से कहने लगा कि राधा मैं बहुत भाग्यवान हूं। मुझे जो महाराज जी उस जंगल में मिले थे उन्होंने एक मंत्र मुझे सिखाया है अब हम सबकी किस्मत बदलने वाली है। यह कहकर चंपक खुशी-खुशी अपने घर में चला गया। उसने उसी दिन से उस मंत्र का जाप करना शुरू कर दिया, उसने अपने पत्नी को भी उस मंत्र के बारे में बताया और कहा कि तुम भी इस मंत्र के जाप मेरे साथ किया करना।

कुछ ही माह के भीतर मानो चंपक की जीवन में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला।उसकी स्वास्थ्य पहले से कई गुना अच्छा हो चुका था, उसके बच्चे और ज्यादा स्वस्थ हो चुके थे, उसे राजा के दरबार से दरबारी का काम करने का अवसर प्राप्त हुआ, उसके जीवन मानो उस दिन के बाद से पूरी तरह बदल गया थी। जैसे अलादीन के चिराग मानो उसका हाथ लग चुका था।

गांव से सारे लोग यहां तक कि गांव के मुखिया भी काफी हैरान थे कि आखिरकार उस दिन चंपक के साथ जंगल में क्या हुआ? जब से चंपक उस जंगल से लौटा है मानो उसकी पूरी दुनिया ही बदल चुकी है। स्वास्थ्य, सौंदर्य, संपर्क, इज्जत, सम्मान, धन मानो सब उसकी ओर दौड़े चले आ रहे हैं।

गांव के सारे लोग काफी हैरान और परेशान भी। चंपक की नए नए नौकरी लगी थी राजा के दरबार में। देखते देखते उसकी किस्मत और ज्यादा चमकने लगी उसे राजा के दरबार में उसकी पदोन्नति होती चली गई। वह धीरे-धीरे उसके जीवन से सारी कठिनाइयां परेशानियां मुश्किलें दूर होते चले गए वो दिन प्रतिदिन और अधिक स्वस्थ और आर्थिक स्थिति मजबूत होता चला गया।

यह सारा चमत्कार का पीछे बस एक ही कारण था महाराज जी का दिया हुआ मंत्र। बहुत दिनों के बाद चंपक का बचपन का दोस्त नीरज उससे मिलने को आया।

नीरज चंपक की अवस्था को देखकर मानो दंग रह गया। नीरज की अवस्था भी कुछ खास नहीं थी। उसकी हालत भी चंपक के जैसा ही था। लेकिन इतने दिनों के बाद चंपक की आर्थिक अवस्था और समृध्दि को देखकर नीरज पूछने लगा कि आखिर क्या राज है उसकी इस सफलता के पीछे? तो उसने उसे बताया वो साधु का बात।

कहने लगा कि वो साधु ने उसे एक मंत्र दिय थे और उसका उपयोग कर जीवन बदल चुका हैं। वो मंत्र उसने अपने दोस्त को भी सिखाया और बताया तुम भी इसका लाभ ले सकते हो। यह सुनते ही नीरज खुशी-खुशी अगले दिन अपने घर को चला और चंपक का हार्दिक दिल से धन्यवाद किया और उसका हमेशा आभारी रहेगा यह कहकर रवाना हो गया।

गुरुजी ने उसे जो मंत्र सिखाया था वह था -“ हे परमेश्वर आपका धन्यवाद”। इस शब्द का मंत्र उसके जीवन को चांदी चांदी कर चुका था इस मंत्र के अभ्यास से चंपक ने अपना जीवन को खुशहाल जीवन में तब्दील कर चुका था। अकसर वो उस महाराज जी के पास जाया करता था और उनका कृतज्ञ ज्ञापन किया करता था।

महाराज जी ने उसे कहा था कि यही एक ऐसा प्रार्थना है, अगर सच्चे दिल से हर वक्त करते रहो तो तुम्हारे जीवन के सारे दुख सुख में बदल जायेंगे, तुम्हारे मुश्किल हल हो जायेंगे, तुम्हारे बिगड़े रिश्ते सुधार जायेंगे,पहले से अधिक स्वस्थ और सम्पूर्ण हो जाओगे।

Moral of the story:

जीवन में आपके पास जो कुछ है उसके लिए धन्यवाद देना आपके जीवन में समृद्धि और आशीर्वाद को और अधिक बढ़ाता है।

Conclusion:

ये थी मेरी लिखी हुए एक काल्पनिक कहानी, जिसका मुख्य उद्देश्य आभार की महिमा को समझने के लिए था। उम्मीद है अपको यह कहानी पसंद आयेगी।

Copy link
Powered by Social Snap