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Meditation कैसे करना चाहिए | ध्यान करने के फ़ायदे

Meditation कैसे शुरू करें

Meditate यह एक अँग्रेजी word है, जिसके मतलब हिंदी में ध्यान होता हैं। जब भी यह ध्यान सब्द मन में आती हैं तब ही एक सवाल भी जागरूक होता हैं के आखिरकार इसके उत्पत्ति कैसे हुए? 
किसने सिखाया सबसे पहले यह ध्यान का रहस्य? कब से चला आ रहा हैं यह धाय प्रक्रिया? ऐसी बहुत से सवाल आपके मन में भी आते होंगे? है ना?
जब में इसके जवाब में खोज करने निकला, तो काफी सारे पौराणिक कथाओं, और सुदूर अतीत के पन्नों से बहुत सी बातें सामने आए जिस से में अनजान था। और मुझे यह जान ने के बाद काफ़ी हैरानी भी हुए के ध्यान सच में एक श्रेष्ठ प्रक्रिया है आत्मज्ञान होने के लिए। 
हमारे मन में यह भी सवाल निश्चित रूप से आते होंगे :
में हूं कोन? मेरा जन्म से पहले क्या अस्तित्व था? में मौत के बाद कहा जाऊँगा? क्या सच में 7 जन्म होते हैं – न उससे भी अधिक? मेरा जीवन का मुख्य उद्देश्य क्या है? क्यों में इस पृथ्वी लोक में हूँ? भगवान कहा है? कैसे होते हैं? हमें दिखते क्यूँ नहीं? क्या भगवान सच में होते है? ऐसे ना जाने कितने सवाल जिसका जवाब सायद ही आप आज तक ढूँढ रहे हों और आपको अगर सब से आसान उपाय पता हो तो मुझे comment कर जरूर बताये। 
आज आप इस post में Meditation कैसे करना चाहिए और ध्यान करने के फायदे के बारे में जानेंगे।
  1. ध्यान की खोज किसने कि 
  2. ध्यान की उत्पत्ति कब हुई
  3. ध्यान का अर्थ क्या है
  4. ध्यान पर अनमोल विचार 
  5. ध्यान क्युं करना चाहिए 
  6. ध्यान कैसे करना चाहिए 
  7. ध्यान करने के फायदे 

धाय की खोज किसने कि?

ध्यान आदिकाल से पृथ्वी में किसी न किसी ऋषि मुनि, योगी, सद्गुरु के माध्यम से हम तक पहुंचा है, लेकिन इसकी शुरुआत किसने की ये सवाल की जवाब मुझे वो उत्तर मिले वही में आपलोगों के साथ सांझा करूंगा। अधिकाशं लोगों का मानना है की,  ध्यान की खोज सबसे पहले आदि योगी जिन्हें भगवान शिव कहा जाता है- उन्होंने कि उनके बाद उनके शिष्यों  के माध्यम  से हम तक पहुंचा है। 
बहुत से सूत्रों से यह भी पता चलता है कि  जब  ब्रह्मा जी की उत्पत्ति का विवरण मिलता है तो वह हिरण्य गर्भ से बाहर आकर विचार करते हैं तो कुछ समझ में नहीं आता तब वह ध्यान में आंखों को बंद करके प्रश्न का उत्तर खोजने के लिए प्रयासरत होते हैं। संभवतः उसी समय से ध्यान का प्रयोग प्रारंभ हुआ।
अन्य सूत्रों में यह भी कहा गया है कि, भारत की प्राचीन शैली और विद्या के सन्दर्भ में महर्षि पतंजलि द्वारा विरचित योगसूत्र में वर्णित अष्टांगयोग का एक अंग हैं ध्यान। 

ध्यान का उत्पत्ति कब हुई 

बहुत पहले, ध्यान का उत्पत्ति सबसे पहले भारत में हुआ था। ध्यान के अभ्यास का सबसे पुराना प्रलेखित साक्ष्य लगभग 5000 से 3500 ईसा पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप में दीवार पर बनी कलाएं हैं, जो लोगों को आधी बंद आंखों के साथ ध्यान मुद्रा में बैठे हुए दर्शाती हैं। 
कुछ पुरातत्वविदों ने बताया है कि ध्यान को ५,००० ईसा पूर्व में शुरू किया था, और इस प्रथा का प्राचीन मिस्र और चीन के साथ-साथ यहूदी धर्म, हिंदू धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और निश्चित रूप से, बौद्ध धर्म में धार्मिक संबंध है। 

मेडिटेशन का वैश्विक प्रसार लगभग पांच या छह शताब्दी ईसा पूर्व शुरू हुआ, क्योंकि यह अभ्यास पूरे एशिया में चला गया। जैसे ही यह एक नए स्थान पर आया, यह धीरे-धीरे प्रत्येक नई संस्कृति को फिट करने के लिए बदला गया। लेकिन यह २० वीं शताब्दी तक नहीं था कि यह विशिष्ट धर्मों के दायरे से परे जाना शुरू हुआ, खासकर पश्चिम में।

ध्यान का अर्थ क्या है 

महर्षि पतंजलि द्वारा विरचित योगसूत्र में वर्णित अष्टांगयोग का एक अंग है। ये आठ अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान तथा समाधि है। ध्यान का अर्थ किसी भी एक विषय की धारण करके उसमें मन को एकाग्र करना होता है। मानसिक शांति, एकाग्रता, दृढ़ मनोबल, ईश्वर का अनुसंधान, मन को निर्विचार करना, मन पर काबू पाना जैसे कई उद्दयेशों के साथ ध्यान किया जाता है। ध्यान का प्रयोग भारत में प्राचीनकाल से किया जाता है।
ध्यान एक जागरूकता है, एक  आत्मज्ञान हासिल करने का प्रक्रिया हैं लेकिन, बहत सारे लोग सोचते हैं कि ध्यान एक ऐसी चीज है जो बहुत कठिन है। ऐसा कुछ मत सोचें, यह ध्यान के बारे में गलत समझा गया भ्रम है। तो वास्तव में, ध्यान, आपको कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए, जब तक आप किसी चीज के बारे में जागरूक हैं, और फिर उस जागरूकता को बनाए रखें, यही ध्यान है।

ध्यान पर अनमोल हिन्दी विचार 

दैनिक ध्यान पर अनमोल हिंदी विचारों को पढ़ना और साझा करना आपको ध्यान करने के लिए प्रेरित कर सकता है, और वे पूरे दिन सकारात्मक विचार प्रक्रियाओं को भी प्रज्वलित कर सकते हैं।  

01. ध्यान पर हिंदी विचार 

“जब ध्यान में महारत हासिल हो जाती है, तो मन हवा रहित स्थान में मोमबत्ती की लौ की तरह अडिग रहता है।” – भगवद गीता

02. ध्यान पर हिंदी विचार 

“ध्यान एक विज्ञान हैं, अंधविश्वास नहीं ” – ओशो 

03. ध्यान पर हिंदी विचार 

“मन को शांत करो, और आत्मा बोलेगी।” – माँ जया सती भगवती

04. ध्यान पर हिंदी विचार 

“अतीत में मत रहो, भविष्य का सपना मत देखो, मन को वर्तमान क्षण पर केंद्रित करो।” – बुद्धा

05. ध्यान पर हिंदी विचार 

“शांत रहना सीखें और आप हमेशा खुश रहेंगे।” – परमहंस योगानंद

ध्यान क्यों करना चाहिए

बहुत से लोग ये जानने में उत्सुकता रखते हैं How to meditate? ध्यान कैसे करें ? लेकिन उससे भी जरूरी है कि ध्यान क्यों करना चाहिए – अगर इस विषय में आपका ज्ञान स्पष्ट नहीं है तो आप ध्यान करना शुरू तो कर देंगे लेकिन इसे आप जारी रख नहीं पाएंगे। इसलिए यह जानना जरूरी है कि ध्यान क्यों करना चाहिए। 
हार एक इंसान सुख-समृद्धि, शांति, अच्छा स्वास्थ्य, सौभाग्य को पाने के लिए करी मेहनत करता है। लेकिन क्या इन्हें हासिल करने में सफल हो सकते है, जी आप जरूर सफलता प्राप्त कर सकते है जब आप आत्मज्ञान और विश्वशक्ति को समझ लें। विश्वशक्ति जिसे comic energy कहा जाता है। यह cosmic एनर्जी परम शक्ति हैं, जीवन शक्ति है, ब्रह्मांड की सारे चीजें इस एक शक्ति से जुड़ी हैं। 
हर एक जीव  को अपने जीवन के हर कार्य करने के लिए इस जीवन शक्ति की जरूरत होती हैं। यही शक्ति के कारण हम देखना, बोलना, चलना, सोचना और शारीर की हर काम को अंजाम देते हैं। 
जब हम नींद में होते हैं तब थोरी मात्र में यह विश्वशक्ति हमें मिलती हैं। लेकिन यह हमारे लिए पर्याप्त नहीं होता है इसलिए आप देखोगे के आधे दिन होते ही आप थक जाते हैं, शारीरिक रूप से तनाव में चले जाते हैं, हमारी ऊर्जा सीमित हो जाती है, हम बीमार हो जाते हैं। 
इन सब से छुटकारा पाने के लिए हमें ज्यादा से ज्यादा जीवन शक्ति जरूरी है। जीवन शक्ति से हम स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख और शांति की प्राप्ति कर सकते हैं और भरपूर विश्वशक्ति से  हमें हार काम से जुझना, अपने मानसिक शक्ति का विकास और हमारी चेतना को बढ़ाने में मदद मिलती है । भरपूर विश्वशक्ति हमें केवल ध्यान से मिलती हैं। इस भरपूर विश्वशक्ति से हम बिना तानाब के हम खुश और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। यही कारण है कि हमें ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। 

ध्यान कैसे करना चाहिए 

ध्यान कैसे करना चाहिए, इससे पहले आपके मन में यह सवाल आयेगा के हर कोई अलग अलग तरह की भिन् भिन्न तरीके को ध्यान के बारे में जानकारी देते हैं। हर धर्म में ध्यान की कई प्रकार होते हैं मगर सारे ध्यान तरीकों का एक ही उद्देश्य होता है आत्मज्ञान को हासिल करना। इसलिए सबसे उचित यह होगा कि आप अपने गुरुदेव के बताये हुए तरीके में ध्यान का अभ्यास करे वही सबसे उचित और सटीक उपाय है। और अगर आपको लगता हैं हमारे बताए हुए तरीके से आपको लाभ मिल रहा हैं तो आप इस तरह भी कर सकते हैं। 
हमनें आज से 5 साल पहले ध्यान के ऊपर बनी एक हिन्दी कार्यक्रम देखा था और मुझे उस कार्यक्रम से ही ध्यान का अर्थ समझ आया था। आज में आपलोगों से वही कार्यक्रम में बताये ध्यान के तरीके के बारे में जानकारी दूंगा और साथ ही में वो वीडियो link  नीचे दिए गए आग चाहे तो उसे देख कर सम्पूर्ण जानकारी ले सकते हैं। 

ध्यान कैसे करें 

ध्यान करने के लिए हमें शरीर के हर कार्य को बंद करना पड़ता है, जैसे देखना, बोलना, सोचना और शरीर का हिलना। ध्यान कैसे करते हैं, आइए जानते हैं – ध्यान करने के लिए सबसे पहला काम है स्थिरता। आप किसी भी तरह बैठ सकते हैं। जमीन या फिर कुर्सी में बैठ कर भी कर सकते हैं। बस आप आराम से बैठे आप किसी भी जगह बैठ सकते हैं बस आपका बैठना आरामदायक होना चाहिए। 
पैरों को मोरे, उंगलियों को एकदूसरे में फंसा लें और आँखें बंद कर लीजिए। अंदर और बाहर के अवाज पर ध्यान मत दीजिए और शारीर को एकदम ढीला छोर दीजिए। कोई भी मंत्र का उच्चारण या कोई भी ध्वनि अंदर की या बाहर की मन की क्रिया है, इसलिए यह बंद होनी चाहिए। 
जब शरीर ढीला छोर दिया जाता है चेतना दूसरी कक्ष में पहुंच जाती हैं। मन विचारों का सामुह है, बहत से विचार हमारे मन में उभर ते हैं और जब विचार आते हैं तब सवाल भी उत्पन्न होंगे। जब हम इस तरह ध्यान में खुद को स्थिर करते हैं, तो बहुत सारे विचार हमारे दिमाग में सूचियाँ करने के लिए आते हैं। मुझे यह करना होगा। मुझे यह करना है,  मुझे उस व्यक्ति से बात करनी है, मेरे पास यह महत्वपूर्ण समय सीमा है, क्या मैं समय बर्बाद कर रहा हूं। मैं कैसे जान सकता हूं कि मैं सही कर रहा हूं या गलत।
विचारों का पीछा मत कीजिए उसमें से अपना ध्यान हटा लीजिए। 
मन के भावों को विचारों को रोकने के लिए आपको अपने सांसो पर ध्यान देने होंगे। सांसो पर अपने ध्यान को केन्द्रित कर दीजिए। जान बुझ कर साँस मत लीजिए। इसे प्राकृतिक रूप से होने दें। अपने सांसो पर पुनः ध्यान को केंद्रित कीजिए। प्राकृतिक साँस पर ध्यान लगाये। सांसो पर बिल्कुल खो जाइए। 

Note: जो लोग पहले कभी ध्यान का अनुभव nahi किये hai उनसे मेरी request है के शुरुआती दिनों में आप ध्यान की  अभ्यास 10 minutes तक कर सकते हैं और मेडिटेशन के लाभ लेने  लिए रोजाना अभ्यास  kare.

ऊपर बताये तरीक़े के अलावा कोई सारे और भी तरीके हैं ध्यान करने के अगर आप जानने की उत्सुकता रखते हैं तो हमें comment कर बताये,  हम ध्यान के प्रकार पर एक पोस्ट लिख देंगे। 

ध्यान करने के फायदे 

ध्यान एक क्रिया है जिसमें व्यक्ति अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में लाने का प्रयत्न करता है। ध्यान का उद्देश्य कोई लाभ प्राप्त करना हो सकता है या ध्यान करना अपने-आप में एक लक्ष्य हो सकता है। ध्यान से अनेकों प्रकार की क्रियाओं का बोध होता है। 
ऐसा पाया गया है कि ध्यान से बहुत से मेडिकल एवं मनोवैज्ञानिक लाभ होते हैं।

  • मन में दाया और प्रेम की एक अलग बौध जन्म लेती हैं
  • बेहतर स्वास्थ्य के अधिकारि बन जाते हैं 
  • शरीर की रोग-प्रतिरोधी शक्ति में बड़ती हैं 
  • रक्तचाप में कमी होती है 
  • तनाव में कमी और मानसिक शांति प्राप्त होती हैं 
  • अपके स्मृति-शक्ति तेज़ होती हैं 
  • आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है 
  • ध्यान से हमे अपने जीवन का उद्देश्य समझने में सहायता मिलती है। इसी तरह किसी कार्य का उद्देश्य एवं महत्ता का सही ज्ञान हो पाता है।
  • छोटी-छोटी बातों  में मन परेशान नहीं होती है  
  • आपके मन सरल और सहज हो जाता है 
  • आप हर व्यक्त खुद में एक असीम आनंद का अनुभव करेंगे 
इसके अलावा और भी bhoat से ध्यान करने के फायदे हैं। आप जैसे जैसे meditation के  तक पहुंचते jaynge  utna hi  adhik आप ध्यान के  फायदे को जान पाएंगे। 

हमें उम्मीद है कि Meditation कैसे करना चाहिए और ध्यान के फायदे अच्छी लगी होगी। apna मूल्यवान time देकर 
Humare पूरे post को padne के लिये आपका बहत बहत धन्यवाद। अगर post पसंद आया हो तो शेयर भी जरूर करें और हमारे Blog को अपना support ♥ देने के लिए subscribe भी जरूर करें। तब तक के लिए अपना खयाल रखें, अपने परिवार दोस्तों से जुड़ें रहें। 
Meditation कैसे करना चाहिए
Image source: pixabay.com

 Reference:

https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8_(%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE)

https://hi.m.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8_(%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%97)

https://wisdomquotes.com/meditation-quotes/


https://hi.quora.com/%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80/answers/196653147?ch=10&share=98f40854&srid=uZbrEN


https://hi.quora.com/%E0%A4%A7%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%96%E0%A5%8B%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80/answers/195159786?ch=10&share=7278a506&srid=uZbrEN

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